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SDGs for All

SDGs for All is a joint media project of the global news organization International Press Syndicate (INPS) and the lay Buddhist network Soka Gakkai International (SGI). It aims to promote the Sustainable Development Goals (SDGs), which are at the heart of the 2030 Agenda for Sustainable Development, a comprehensive, far-reaching and people-centred set of universal and transformative goals and targets. It offers in-depth news and analyses of local, national, regional and global action for people, planet and prosperity. This project website is also a reference point for discussions, decisions and substantive actions related to 17 goals and 169 targets to move the world onto a sustainable and resilient path.

फोटो: कुतुप्पलोंग शरणार्थी शिविर, कॉक्स बाज़ार, बांग्लादेश।यह शिविर उन तीन शिविरों में से एक है जिनमें बर्मा में अंतर-सांप्रदायिक हिंसा से बच कर भागे हुए लगभग 300,000 रोइंग लोग रह रहे हैं। क्रेडिट: विकिपीडिया कॉमन्स

जयश्री प्रियालाल* द्वारा

सिंगापुर (आईडीएन) - रोहंगिया संकट और शरणार्थियों का भारी संख्या में बांग्लादेश की ओर प्रवाह का मुद्दा वर्तमान में मीडिया में छाया हुआ है। एक श्रीलंकाई के रूप में मैं पूर्व में श्रीलंका और वर्तमान में म्यांमार में इस राष्ट्रीयता के विवाद की समानता को समझ सकता हूँ। भारत के साथ इस संकट को हल करने का श्रीलंका का दृष्टिकोण म्यांमार द्वारा अनुसरण के लिए एक रूपरेखा प्रदान कर सकता है।

1948 में जब श्रीलंका ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ तब इस द्वीपीय राष्ट्र में करीब 10 लाख तमिल थे जिन्हें श्रीलंका में "भारतीय तमिल" कहा जाता था। इन निम्नतम दलित वर्ग के लोगों को अंग्रेजों द्वारा सिंहली किसानों की जब्त की हुई भूमि पर लगाए गए चाय बागानों में काम करने के लिए दक्षिण भारत से लाया गया था, जहाँ कि उन सिंहली किसानों ने काम करने से इनकार कर दिया था। इस प्रकार इन तमिलों की उपस्थिति का सिंहलियों द्वारा जबर्दस्त विरोध किया गया। अंग्रेज़ों ने एक राष्ट्रविहीन समुदाय बना दिया जिसके नागरिक न भारतीय रहे न श्रीलंकाई।

फोटो: अफ्रीका में बहुत से लोगों के लिए महासागरीय जीवन का महत्व बहुत कम है क्योंकि वे फोटो में दिखाए गए केप टाउन के समुद्र तटों जैसे म्यूज़ेनबर्ग समुद्र तट पर छुट्टियों का आनंद लेते हैं। क्रेडिट: जेफरी मोयो/ आईडीएन

जेफरी मोयो द्वारा

हरारे (आईडीएन) - सुबह होते ही, पेटिना ड्यूबे अपने घर से निकलती हैं, उनके सर पर उस कचरे से भरी बोरी है जो उनके घर के आँगन में पड़ा हुआ था क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार ज़िम्बाब्वे की राजधानी हरारे में नगरपालिका के कचरा एकत्रित करने वालों के पास अपना कार्य करने के लिए ईंधन उपलब्ध नहीं है।

43 वर्ष की ड्यूबे जो हरारे के उच्च घनत्व वाले उपनगर वॉरेन पार्क की निवासी हैं को जाहिर तौर पर कोई परवाह नहीं है कि उसके द्वारा फेंका जाने वाला कचरा कहाँ जाएगा। ड्यूबे कहती हैं "मैं वाकई में इस बात को ले कर चिंतित नहीं हूं कि यह कचरा कहाँ जाएगा; मैं बस इसे पास ही स्थित नदी के पास फेंक दूँगी।"

फोटो: फुनाफुटी एटोल पर एक समुद्र तट, तुवालु, पर एक खिले हुए दिन। क्रेडिट: विकिपीडिया कॉमन्स।

रमेश जौरा द्वारा

बॉन (आईडीएन) - दुनिया के 48 सबसे गरीब और जलवायु परिवर्तन के संबंध में सबसे संवेदनशील देश इस बात को ले कर खासे चिंतित हैं कि क्या आने वाले महीनों में 2015 में पेरिस में हुए जलवायु परिवर्तन समझौते के सभी पहलुओं को लागू किया जाएगा।

इस बात को सर्वाधिक अविकसित देशों के समूह (एलडीसी) के अध्यक्ष, इथियोपिया के गेब्रू जेम्बर एन्दलेव ने बॉन में दो सप्ताह की संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के अंतिम दिन 18 मई को जोर दे कर कहा। इस वार्ता में 140 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

एलडीसी उन देशों का समूह है जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने उनकी न्यून सकल राष्ट्रीय आय, कमज़ोर मानवीय संसाधन और अत्यधिक आर्थिक असुरक्षा के आधार पर "सर्वाधिक अविकसित" देशों के रूप में वर्गीकृत किया हुआ है।

फोटो: लड़कियां, मालावी में युवा संरक्षण कार्यक्रम से। यह कार्यक्रम यौन और प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान करता है, युवा लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में मदद करता है और नेतृत्व प्रशिक्षण प्रदान करता है। क्रेडिट: यूएनएफपीए मालावी / होप नोवीरा

लेखक जे. नेस्ट्रेनिस

न्यू यार्क (आईडीएन) - संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या निधि यूएनएफपीए के नए शोध से पता चला है कि प्रति व्यक्ति पर प्रति वर्ष खर्च किए 30 डॉलर से भी कम में किशोर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत काम किया जा सकता है।

यह रिपोर्ट 'दी लैनसेट' में 21 अप्रैल से 23 अप्रैल 2017 तक वाशिंगटन डीसी में विश्व बैंक स्प्रिंग बैठकों की पूर्व संध्या पर प्रकाशित हुई है। इन बैठकों में 188 देशों के वित्त और विकास के नेताओं द्वारा किशोरों पर निवेश किये जाने की आवश्यकता पर पर चर्चा की जानी थी।

दी लैनसेट एक स्वतंत्र, अंतरराष्ट्रीय व्यापक चिकित्सा पत्रिका है जिसका उद्देश्य विज्ञान को व्यापक रूप से उपलब्ध कराना है ताकि औषधि समाज की सेवा करते हुए इसे बदल सके और लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सके।

फोटो: 1 जून, 2016 को ग्योंग्जू, दक्षिण कोरिया में एक संवाददाता सम्मेलन में संचार एवं जन सूचना के लिए संयुक्त राष्ट्र की अंडर-सेक्रेटरी-जनरल, क्रिस्टीना गैलाच। क्रेडिट: कत्सुहीरो असागिरी। आईडीएन-आईएनपीएस

संचार और जन सूचना के लिए संयुक्त राष्ट्र की अंडर-सेक्रेटरी-जनरल, क्रिस्टीना गैलाच के साथ साक्षात्कार

न्यूयॉर्क (आईडीएन) - गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने 1 जून, 2016 को दक्षिण कोरिया के ग्योंग्जू में संपन्न 66वें संयुक्त राष्ट्र के जन सूचना विभाग (डीपीआई) / एनजीओ के सम्मेलन में सतत विकास लक्ष्य 4 - सभी के लिए समावेशी और न्यायसंगत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और आजीवन अवसरों को बढ़ावा देना - के महत्व को स्वीकार करते हुए एक वैश्विक शिक्षा कार्रवाई एजेंडे को अपनाया था।

तब से क्या कुछ हुआ है? सितंबर 2015 में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा समर्थित सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के कार्यान्वयन के दूसरे वर्ष में युवा समूह क्या भूमिका निभा रहे हैं? क्या जनवरी में एक नए सेक्रेटरी-जनरल और प्रबंधन टीम के पदभार ग्रहण करने के बावजूद 2017 में एक डीपीआई/एनजीओ सम्मेलन आयोजित होगा? संयुक्त राष्ट्र में संचार और जन सूचना के लिए अंडर-सेक्रेटरी जनरल के रूप में सेवारत होने का क्या मतलब है?

Photo: Youths of Rocket and Space group in Kathmandu brainstorm on how to make their presentations on Sexual and Reproductive Rights more effective. Credit: Stella Paul | IDN-INPS

स्टेला पॉल का आलेख

काठमांडू (आईडीएन) - 21 वर्षीया पवित्रा भट्टराई मीठी आवाज और दिलकश मुस्कान बिखेरने वाली एक शर्मीली युवती है। लेकिन जब उससे यौन स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में पूछा जाता है तो उसकी शर्म एक पल में गायब हो जाती है जब वह तत्परता से यह बताती है कि कैसे उसके देश के युवाओं के पास इस तरह की सेवाओं का अधिकार होना चाहिए।

अचानक वह अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्व दिखते हुए कहती है, "हमारा देश युवा लोगों के कंधों पर चलता है। इसलिए हम एचआईवी से ग्रस्त युवा लोगों से भरा देश होने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। हमारे पास यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं (SRHR) की पूरी पहुँच होनी चाहिए।"

फोटो क्रेडिट: फबिओला ओर्तिज़ | IDN-INPS

फेबियोला ओर्टिज़ द्वारा

माराकेच (आईडीएन) - माराकेच में आयोजित संयुक्त राज्य जलवायु परिवर्तन सम्मलेन में जलवायु परिवर्तन को ले कर किये जा रहे वैश्विक प्रयासों में महिलाओं और लड़कियों को शामिल करते हुए आगे की रह तय करना प्रतिनिधिमंडलों और गैर-राज्य संस्थाओं (नॉन-स्टेट एक्टर्स) के लिए एक विषम चुनौती थी।

इस सम्मलेन, जिसे औपचारिक रूप से दलों के बाइसवें सम्मेलन (COP22) के रूप में जाना जा रहा है, में एक दिन (14 नवम्बर) विशेष रूप से लैंगिक मुद्दों पर चर्चा के लिए रखा गया। यह चर्चा जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राज्य फ्रेमवर्क कन्वेंशन के अंतर्गत आयोज्य थी।

यूएनएफसीसीसी के कार्यकारी सचिव पैट्रिसिया एस्पीनोसा ने कहा, "अनेक अध्ययनों ने यह साबित हो गया है कि जलवायु परिवर्तन के मामले में महिलाएं सबसे कमज़ोर हैं और यही कारण है कि इस मुद्दे पर मज़बूत नेतृत्व की आवश्यकता है।"

फोटो: संयुक्त राष्ट्र में एसजीआई-ईआईसी कार्यक्रम का अवलोकन। क्रेडिट: सुनीओ याबुसाकी।

रॉडने रेनॉल्ड्स द्वारा

संयुक्त राष्ट्र (आईडीएन) - महासचिव बान की-मून, जो लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास के लक्ष्यों को 2030 तक लागू करने में युवाओं द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है, ने बताया है कि आर्थिक संकट और मंदी के चलते दुनिया भर के युवा बहुत अधिक प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने युवाओं की एक सभा में कहा "आप इस नए विकास कार्यक्रम के मशाल धारक हैं। आप गरीबी, असमानता, भूख और पर्यावरण क्षरण को समाप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आपके प्रयास एक ऐसे युग का सूत्रपात करेंगे जिसमें कोई पीछे नहीं छूटेगा।

Photo: Artificial limbs at the UXO Information Centre In Vientiane made in Laos for people whose limbs were blown off by the Unexploded American bombs. Credit: Kalinga Seneviratne | IDN-IPS

लेखक कलिंगा सेनेविरत्ने

वियनतियाने (आईडीएन) - अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की सितंबर की शुरुआत में लाओस की यात्रा से इतिहास के सबसे भीषण युद्ध अपराधों में से एक, 1960 और 1970 के दशक में भारत-चीन युद्ध के दौरान छोटे से भूभाग से घिरे दक्षिण-पूर्व एशियाई देश की बमबारी और इसकी बड़े पैमाने पर मानवीय और विकास संबंधी लागतों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली है।

लाओ लोगों ने विकास और आर्थिक गतिविधियों पर अप्रयुक्त युद्धक सामग्रियों (UXO) के प्रभाव को कम करने के लिए अपने स्वयं के सतत विकास लक्ष्य का शुभारंभ करने के लिए आसियान और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलनों के लिए ओबामा और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून दोनों की यात्राओं का उपयोग किया।

Photo: Adolescent girls in Delpara at a Shonglap session. Credit: Naimul Haq

समाचार फ़ीचर नइमुल हक़ द्वारा

कॉक्स बाजार | बांग्लादेश (आईडीएन) - बांग्लादेश में कई युवा लड़कियां ग़रीबी या ग़रीबी से संबंधित समस्याओं के कारण विद्यालय छोड़ देती हैं। लेकिन शिक्षा जारी रखने के लिए मजबूत मंशा ने पिछले कुछ वर्षों में परिदृश्य बदल दिया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों में पितृसत्ता की प्रथाओं और लड़कियों की शिक्षा और रोज़गार के खिलाफ पारंपरिक मान्यताओं के बावजूद बांग्लादेश के कई क्षेत्रों में किशोरियों ने दिखा दिया है कि कैसे ऐसी परंपराओं को धता बता कर अपने जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

शॉनग्लैप - या बातचीत जो क्षमता निर्माण या व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए कहता है, समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए आजीविका के अवसर प्रदान करता है - ने ऐसे लोगों को सीखने के लिए प्रोत्साहित कर एक सकारात्मक प्रभाव डाला है।

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