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Reporting the underreported about the plan of action for People, Planet and Prosperity, and efforts to make the promise of the SDGs a reality.
A project of the Non-profit International Press Syndicate Group with IDN as the Flagship Agency in partnership with Soka Gakkai International in consultative status with ECOSOC.


SGI Soka Gakkai International

 

फोटो: कामूकुंजी कम्युनिटी की सभा।

फ्रांसिस किन्युआ द्वारा*

नाइरोबी (IDN) – नौ महीने बंद रहने के बाद, एक नए सत्र की शुरुआत करने और COVID-19 की विश्वव्यापी महामारी के परिणामस्वरूप 2020 में बाधित हुए विद्यालय वर्ष को फिर से शुरू करने के लिए केन्या के स्कूल फिर से खुले। 4 जनवरी की सुबह, रास्तों पर उल्लसित बच्चों के झुंड रंगबिरंगी पोशाकें पहनकर अपने स्कूल जाते हुए देखे गए।

बच्चे फिर से स्कूल जाने को लेकर उत्साहित थे। न्यू पुमवानी प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाली, केट की 12 वर्ष की बेटी ने कहा कि, घर पर रहना थकाने वाला और उबाऊ अनुभव था। उसने कहा, “मैं फिर से पढ़ना चाहती थी, मुझे मेरे सहपाठियों व शिक्षकों की याद आती थी, और मैं फिर से स्कूल लौटकर खुश हूँ।”

Image credit: UNAIDS

सोमर विजयदास का दृष्टिकोण*

न्यूयॉर्क (IDN) – वर्ष 1981 में, अमेरिका में एचआईवी/एड्स की पहली बार पहचान की जाने के बाद से, एचआईवी से लगभग 7 करोड़ 60 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं, और लगभग 3 करोड़ 50 लाख लोग एड्स के कारण मर चुके हैं — आजतक की मृत्यु की सबसे बड़ी वैश्विक संख्या — और यह आधुनिक चिकित्सा के इतिहास में दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक विषयों और भयभीत करने वाले व विवादस्पद रोगों में से एक भी है।

हालांकि, इस वर्ष, जानलेवा कोरोनावायरस (COVID-19) दुनियाभर में अब तक 6 करोड़ 50 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका है और इसके कारण 15 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

Photo: Bhikkhuh Sanghasena, a leading Buddhist monk based in the state capital Leh, led a procession of local spiritual leaders across the town centre. The spiritual leaders included not only Buddhists, but also Muslims, Hindus, Christians and Sikhs.

कलिंगा  सेनेविरत्ने द्वारा

यह लेख लोटस न्यूज फीचर्स और आयडीएन-इन डेप्थ न्यूज़, गैर-लाभकारी अंतर्राष्ट्रीय प्रेस सिंडिकेट की प्रमुख एजेंसी की संयुक्त प्रस्तुतियों की श्रृंखला में 43 वां है। पिछली रिपोर्टों के लिए यहां क्लिक करें

सिंगापुर (आयडीएन) - जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी 10 सितंबर को मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक के मौके पर मिले, तो वांग ने कहा कि यह "भारत और चीन के लिए दो पड़ोसी प्रमुख देशों के रूप में मतभेद होना सामान्य था"।

Photo: UN Secretary-General António Guterres delivers the annual Nelson Mandela Lecture. Credit: UN Photo/Eskinder Debebe

जय रामचंद्रन द्वारा

न्यू यॉर्क (IDN) – संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गटेरेस ने एक आश्चर्यजनक नाटकीय रूख अपनाते हुए, विशेष रूप से दुनिया के मूलभूत आवश्यकताओं से वंचितों के बारे में दोषपूर्ण तरीके से फैलाई जाने वाली “भ्रांतियों एवं झूठ” की श्रंखला की आलोचना की है। The COVID-19 विश्वव्यापी महामारी ने सभी झूठ उजागर कर दिए हैं जैसे कि यह झूठ कि मुक्त बाज़ार सभी तक स्वास्थ्य-सेवाएं पहुँचा सकते हैं; यह झूठ कि निःशुल्क सेवा कार्य, कोई कार्य नहीं होता है; यह भ्रम कि हम नस्लभेद से मुक्त हो चुकी दुनिया में रहते हैं; यह मिथक कि हम सब एक जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं”।

इस भ्रामक मिथक को उजागर करते हुए, वे कहते हैं: “यद्यपि हम सब एक ही सागर में तैर रहे हैं, यह स्पष्ट है कि कुछ सूपरयाट में सवार हैं जबकि अन्य नाव के अवशेषों के सहारे तैर रहे हैं।”

INPS-IDN द्वारा कोरोनावायरस से प्रभावित अफ्रीका का कलाश़ और एनिमेटेड वीडियो।

लीसा वीवेस, ग्लोबल इनफोर्मेशन नेटवर्क

न्यू यॉर्क (IDN) –जहाँ अफ्रीका, पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की तरह, कोरोनावायरस के विरुद्ध कठिन संघर्ष कर रहा है, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक विशेषज्ञ ने COVID-19 से प्रभावित लोगों से संबंधित डराने वाले अनुमानों पर सवाल उठाया है। उसी समय, घाना ने एक चौंकाने वाल कदम उठाते हुए लॉकडाउन में आंशिक छूट देने का आदेश दिया है। यह विश्वव्यापी महामारी का वायरस रवांडा को ऋण में कटौती के दिखावे के पीछे भारी ‘ऋणों’ के प्रलोभन का शिकार बना रहा है।

Photo: A health worker administers a vaccination against cholera to a young boy in Yemen. Credit: UNICEF/Saleh Bahless

शान बुकानन द्वारा

जिनेवा (IDN) – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वर्ष 2020 की शुरुआत में जारी की गई गंभीर, वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों की एक सूची गहरी चिंता को दर्शाती है कि विश्व के नेता मुख्य स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और प्रणालियों में पर्याप्त संसाधनों का निवेश करने में विफल हो रहे हैं। जिनेवा स्थित यूएन एजेंसी का कहना है कि ऐसा करना जीवन, आजीविका और अर्थव्यवस्थाओं को खतरे में डाल रहा है।

यह सिफारिश करते हुए कि अधिक लोगों को उनके रहने के स्थान के समीप उनकी आवश्यक गुणवत्ता वाली सेवाओं तक पहुँच प्रदान करने के लिए देश अपने सकल घरेलू उत्पाद का एक प्रतिशत हिस्सा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च करें, WHO ने दशक भर के

चित्र सौजन्य: सुरक्षा अध्ययन संस्थान

जोनाथन पावर का दृष्टिकोण

 “हर जगह निर्धनता को सभी रूपों में खत्म करनासंयुक्त राष्ट्र के 17 लक्ष्यों में से पहला लक्ष्य है। नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि अत्यंत निर्धनता को समाप्त करने के लिए – प्रति वर्ष केवल $78 बिलियन डॉलर की लागत आएगी – जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.1% से भी कम है। दरअसल, ग्लोबल वार्मिंग का मुकाबला करने के लिए वित्तपोषण के मुकाबले अति निर्धनता को खत्म करने को प्राथमिकता देने का एक तर्क है। यह ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए आवश्यक राशि का जितना अनुमान लगाया जा रहा है, - ऊर्जा संबंधी मामलों पर $2.5 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष जो नवीकरणीय ऊर्जा पर अत्यधिक लक्षित है, उससे कहीं अधिक बहुत अधिक सस्ता अभियान है।

Photo credit: UN.

जे नेसत्रनिस द्वारा

न्यूयॉर्क (IDN) -संयुक्त राष्ट्र के कामकाज की धमकी देने वाले धन की कमी से कई संकटों के बीच,महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने विश्व निकाय के अतिआवश्यक महत्व पर जोर देने वाली योजनाओं की घोषणा की है। उन्होंने, 2020 में संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगांठ की स्मृति में, कहा कि हम चाहते हैं कि भविष्य के निर्माण में वैश्विक सहयोग की भूमिका में एक बड़ी और समावेशी वैश्विक बातचीत की सुविधा हो।

"संयुक्त राष्ट्र दिवस चार्टर के स्थायी आदर्शों पर प्रकाश डालता है, जो 74 साल पहले लागू हुए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि चार्टर,  तूफानी वैश्विक समुद्रों के बीच, हमारा साझा नैतिक लंगर बना हुआ है”।

चित्र का स्रोत: The Hindu में OpEd – For a malnutrition-free India

सुधा रामचंद्रन के द्वारा

बैंगलोर (IDN) – भारत को अपने बच्चों में शारीरिक वृद्धि दर की कमी को को कम करने के लिए दोगुना प्रयास करना होगा, न केवल इसलिए कि इससे बेहतर ढंग से उनका मानसिक एवं शारीरिक विकास होगा, उनकी सीखने की क्षमता में वृद्धि होगी और उन्हें अपने जीवन-स्तर को बेहतर बनाने के अवसर प्राप्त होंगे बल्कि इसलिए भी ताकि देश के राष्ट्रीय पोषण अभियान के द्वारा निर्धारित 2022 की अंतिम समय-सीमा के अंदर राष्ट्रीय पोषण के लक्ष्य को पूरा किया जा सके और वर्ष 2030 तक सस्टेनेबल डिवेलप्मेंट गोल्स (SDGs) को पूरा करने के लिए विश्व को सक्षम बनाया जा सके।

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