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SDGs for All

SDGs for All is a joint media project of the global news organization International Press Syndicate (INPS) and the lay Buddhist network Soka Gakkai International (SGI). It aims to promote the Sustainable Development Goals (SDGs), which are at the heart of the 2030 Agenda for Sustainable Development, a comprehensive, far-reaching and people-centred set of universal and transformative goals and targets. It offers in-depth news and analyses of local, national, regional and global action for people, planet and prosperity. This project website is also a reference point for discussions, decisions and substantive actions related to 17 goals and 169 targets to move the world onto a sustainable and resilient path.

फोटो: अफ्रीका में बहुत से लोगों के लिए महासागरीय जीवन का महत्व बहुत कम है क्योंकि वे फोटो में दिखाए गए केप टाउन के समुद्र तटों जैसे म्यूज़ेनबर्ग समुद्र तट पर छुट्टियों का आनंद लेते हैं। क्रेडिट: जेफरी मोयो/ आईडीएन

जेफरी मोयो द्वारा

हरारे (आईडीएन) - सुबह होते ही, पेटिना ड्यूबे अपने घर से निकलती हैं, उनके सर पर उस कचरे से भरी बोरी है जो उनके घर के आँगन में पड़ा हुआ था क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार ज़िम्बाब्वे की राजधानी हरारे में नगरपालिका के कचरा एकत्रित करने वालों के पास अपना कार्य करने के लिए ईंधन उपलब्ध नहीं है।

43 वर्ष की ड्यूबे जो हरारे के उच्च घनत्व वाले उपनगर वॉरेन पार्क की निवासी हैं को जाहिर तौर पर कोई परवाह नहीं है कि उसके द्वारा फेंका जाने वाला कचरा कहाँ जाएगा। ड्यूबे कहती हैं "मैं वाकई में इस बात को ले कर चिंतित नहीं हूं कि यह कचरा कहाँ जाएगा; मैं बस इसे पास ही स्थित नदी के पास फेंक दूँगी।"

Photo : Une plage par une journée ensoleillée dans l'atoll de Funafuti, au milieu des îles Tuvalu. Crédit photo : Wikimedia Commons.

Par Ramesh Jaura

BONN (IDN) – Les 48 pays les plus pauvres du monde, de surcroît les plus exposés au changement climatique, ont exprimé leur vive inquiétude quant à savoir si les progrès substantiels seraient faits au cours des prochains mois dans la mise en œuvre des différents points de l’Accord de Paris de 2015 sur le changement climatique.

Gebru Jember Endalew d’Éthiopie, président du groupe des pays les moins avancés (PMA), a souligné cette préoccupation lors de la clôture d’une session de négociations de deux semaines sur le changement climatique, organisée sous l’égide des Nations unies le 18 mai à Bonn, et à laquelle participaient des délégués de 140 pays.

फोटो: फुनाफुटी एटोल पर एक समुद्र तट, तुवालु, पर एक खिले हुए दिन। क्रेडिट: विकिपीडिया कॉमन्स।

रमेश जौरा द्वारा

बॉन (आईडीएन) - दुनिया के 48 सबसे गरीब और जलवायु परिवर्तन के संबंध में सबसे संवेदनशील देश इस बात को ले कर खासे चिंतित हैं कि क्या आने वाले महीनों में 2015 में पेरिस में हुए जलवायु परिवर्तन समझौते के सभी पहलुओं को लागू किया जाएगा।

इस बात को सर्वाधिक अविकसित देशों के समूह (एलडीसी) के अध्यक्ष, इथियोपिया के गेब्रू जेम्बर एन्दलेव ने बॉन में दो सप्ताह की संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के अंतिम दिन 18 मई को जोर दे कर कहा। इस वार्ता में 140 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

एलडीसी उन देशों का समूह है जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने उनकी न्यून सकल राष्ट्रीय आय, कमज़ोर मानवीय संसाधन और अत्यधिक आर्थिक असुरक्षा के आधार पर "सर्वाधिक अविकसित" देशों के रूप में वर्गीकृत किया हुआ है।

Photo: A beach at Funafuti atoll, Tuvalu, on a sunny day. Credit: Wikimedia Commons.

بلدان العالم الأكثر فقرا والأكثر تعرضا يريدون إجراءات مناخية

من راميش جورا

بون (IDN) - تعرب الدول الـ 48 الأكثر فقرا في العالم، والتي هي معرضة بشكل خاص للتأثر بتغير المناخ، عن قلقها المتنامي بشأن ما إذا كان سيتم تطبيق "تقدماً جوهريا" خلال الأشهر المقبلة بشأن تنفيذ اتفاق باريس 2015 المتعلق بتغير المناخ بصفة شاملة كما هو منصوص عليه.

هذا ما أكده رئيس مجموعة دول العالم الثالث (LDC)، السيد جيبرو جيمبر إنداليو من إثيوبيا، بعد ترشيحه من قِبل مندوبو 140 دولة خلال دورة مفاوضات الأمم المتحدة بشأن تغير المناخ التي استمرت أسبوعين في 18 مايو بمدينة بون الألمانية.

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Striving for People Planet and Peace 2017

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